अब अमीरका में डोनाल्ड टृ्ंप को समर्थन देने पर बवाल क्यों,जब ३७० को हटाने के साथ ही भारत की विदेश नीति बदल गई।


अनुच्छेद ३७० को हटाने के साथ ही भारत की विदेश नीति बदल गई थी। अब अमरीका में डोनाल्ड ट्रंप को समर्थन देने पर बबाल क्यों? हमारी पहली प्राथमिकता कश्मीर घाटी में शांति कायम करना है। 
२२ सितम्बर को ह्यूस्टन में अमरीका के आम चुनाव के मद्देनजर जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि अबकी बार ट्रंप सरकार, तो भारत में कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने बबाल मचा दिया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि नरेन्द्र मोदी भारत की विदेश नीति में बदलाव कर रहे हैं। अब भारत की नीति निष्पक्ष थी, लेकिन अगले वर्ष अमरीका में होने वाले आम चुनाव में मोदी ने रिपब्लिकन पार्टी के डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन कर एक तरफा कार्यवाही की है। यदि अमरीका के चुनाव में डेमोक्रेटिव पार्टी का उम्मीदवार राष्ट्रपति बन गया तो क्या होगा? कांग्रेस और विपक्ष के तर्क अपनी जगह हैं, लेकिन विपक्ष को यह समझना चाहिए कि पांच अगस्त को जब संसद में जम्मू कश्मीर से अनुचछेद ३७० को हटाने का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ, तभी से भारत की विदेश नीति बदल गई थी। आजादी के बाद से ही कांग्रेस अनुच्छेद ३७० को अपने गले में लटकाए घूम रही थी और कश्मीर को भारत-पाकिस्तान का द्विपक्षीय मुद्दा बताती रही। जो ३७९ अस्थायी अनुच्छेद था उसे ७० सालों तक बनाए रखा। लेकिन पांच अगस्त को भारत ने अपनी नीति में बदलाव करते हुए कहा कि कश्मीर हमारा आंतरिक मामला है और इसे हम सुलझा लेंगे। ३७० को हटाने के बाद केन्द्र सरकार ने एक ही झटके में जम्मू कश्मीर के ८० प्रतिशत क्षेत्र को आतंक से मुक्त कर दिया। अब जिस २० प्रतिशत क्षेत्र का रोना रोया जा रहा है, उसमें भी पांच अगस्त के बाद सुरक्षा बलों को किसी स्थान पर गोली नहीं चलानी पड़ी है। कश्मीर घाटी के सभी नागरिकों को चिकित्सा सुविधा से लेकर खाने पीने की सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही है। सरकार ने पाकिस्तान में बैठे आतंकवादियों और कश्मीर घाटी में बैठे अलगाववादियों के बीच कनेक्शन काट दिया है, इसलिए पाकिस्तान बिल बिला रहा है। आज भारत के लिए कश्मीर घाटी में सामान्य स्थिति कायम करना पहली प्राथमिकता है और इसमें अमरीका के राष्ट्रपति ट्रंप पूरा सहयोग कर रहे हैं। ऐसे में यदि विदेश नीति में बदलाव भी हो रहा है तो यह देश हित में है। आजादी के बाद से हम देख रहे हैं कि कश्मीर के मुद्दे पर हमें बहुत कुछ सहना पड़ रहा है, लेकिन अब कश्मीर समस्या को जड़ से ही समाप्त किया जा रहा है। ३७० को हटाना सफल रहा तो फिर भारत को किसी भी देश की मदद की दरकार नहीं रहेगी। भारत खुद शक्तिशाली देश बन जाएगा। हम चाहेंगे जैसी हमारी विदेश नीति होगी। जहां तक अमरीका का सवाल है तो ट्रंप से पहले डेमोक्रेट पार्टी बारक ओबामा राष्ट्रपति थे। नरेन्द्र मोदी के ओबामा से भी दोस्ताना संबंध रहे। जब अंतर्राष्ट्रीय मंच पर तेजी से बदलाव हो रहा है, तब विदेश नीति भी प्रभावित हो रही है। पांच अगस्त से पहले अनुच्छेद ३७० में बदलाव की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। लेकिन आज न केवल ३७० के प्रावधान खत्म किए, बल्कि जम्मू कश्मीर को केन्द्र शासित प्रदेश बना दिया गया।


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