अजमेर के डीएवी कॉलेज के प्राचार्य लक्ष्मी कांत शर्मा और छात्रों संग अध्यक्ष सीताराम चौधरी के बीच थप्पड़ों के आदान-प्रदान का जिम्मेदार कौन?


अजमेर के डीएवी कॉलेज के प्राचार्य लक्ष्मीकांत शर्मा और छात्र संघ अध्यक्ष सीताराम चौधरी के बीच थप्पड़ों के अदान-प्रदान का जिम्मेदार कौन? मौजूदा शिक्षा व्यवस्था की कितनी जिम्मेदारी ।
अजमेर के डीएवी कॉलेज के प्राचार्य लक्ष्मीकांत शर्मा ने जब छात्र संघ अध्यक्ष सीताराम चौधरी को कॉलेज परिसर में जन्म दिन का केक काटने से मना किया तो चौधरी ने गुस्से में केक को प्राचार्य के मुंह पर दे मारा। कॉलेज के शिक्षकों और विद्यार्थियों की मौजूदगी में हुए इस अपमान को प्राचार्य से सहा नहीं गया और उन्होंने चौधरी के थप्पड़ मार दिया। बस फिर क्या था कि दोनों में थप्पड़ों का आदान प्रदान हो गया। केक काटने की घटना भले ही छोटी हो, लेकिन प्राचार्य और छात्र के बीच थप्पड़ों का चलना बेहद ही शर्मनाक है। क्या देश में ऐसी ही शिक्षा दी जा रही है, जिसमें गुरु शिष्य के बीच थप्पड़ों का आदान प्रदान हो? आखिर इस बुराई का जिम्मेदार कौन है? अजमेर के डीएवी कॉलेज का इतिहास रहा है, लेकिन अब यह कॉलेज अपने सबसे बुरे दिनों से गुजर रहा है। सरकार से कोई आर्थिक सहयोग नहीं मिलता। प्राचार्य लक्ष्मीकांत शर्मा अपने पुरुषार्थ से किसी तरह कॉलेज के संचालन में लगे हुए हैं। चूंकि कॉलेज प्रबंधन के पास जमीन जायदाद बहुत है, इसलिए भू माफियाओं की नजर भी लगी हुई है। कृषि विज्ञान के क्षेत्र में तो पूरे देश में डीएवी कॉलेज की ख्याति है। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में बच्चों को कम शुल्क पर पढ़ाया जा रहा है। जिन विद्यार्थियों का प्रवेश सरकारी कॉलेजों में नहीं होता, उनके लिए डीएवी कॉलेज शिक्षा ग्रहण का एक महत्वपूर्ण केन्द्र है, ऐसे में कॉलेज परिसर में अनुशासन तो रहना ही चाहिए। जहां तक छात्र संघ अध्यक्ष सीताराम चौधरी की भूमिका का सवाल है तो वे पहले विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता रहे, लेकिन किन्हीं कारणों से विद्यार्थी परिषद ने चौधरी को निष्कासित कर दिया। इसलिए इस बार चौधरी ने विद्यार्थी परिषद के उम्मीदवार के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। जब सीताराम चौधरी कांग्रेस के एनएसयूआई तथा भाजपा के विद्यार्थी परिषद के उम्मीदवारों को हरा कर छात्र संघ के अध्यक्ष बने हैं तो कॉलेज परिसर में अपने जन्मदिन का केक तो काटेंगे ही। चुनाव की राजनीति करने वालों का अपना नजरिया होता है। प्राचार्य और छात्र संघ अध्यक्ष के अपने अपने नजरिए हैं। इसमें शिक्षा व्यवस्था गौण हो गई है। अब वो जमाना तो लद गया, जिसमें विद्यार्थियों  पर माता-पिता का नियंत्रण होता था। अब प्राचार्य के मुंह पर केक फेंकने और थप्पड़ मारने के लिए चौधरी के माता-पिता तो डांटेंगे नहीं। चौधरी को भविष्य में असली राजनीति करनी है, इसलिए प्राचार्य के थप्पड़ मारने वाली घटना तो बहुत काम आएगी। ऐसे बहुत से राजनेता हैं जो ऐसी घटनाएं कर आगे बढ़े हैं। हो सकता है कि एक दिन सीताराम चौधरी प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री बन जाएं और इसी डीएवी कॉलेज में चीफ गेस्ट बन आएं। मौजूदा हालातों मेंशिक्षा व्यवस्था पर जातिगत राजनीति हावी है। 


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