गांधी जयंती के बहाने एक फिर करेंगे सचिन पायलट शक्ति प्रदर्शन।


गांधी जयंती के बहाने एक फिर करेंगे सचिन पायलट शक्ति प्रदर्शन। 
मतमभेदों के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मूक दर्शक बने। 
गांधी जयंती के बहाने राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट एक फिर अपना शक्ति प्रदर्शन करेंगे। यह दिखाने की कोशिश होगी कि राज्य सरकार कांग्रेस संगठन के दम पर चल रही है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ मतभेदों के चलते पायलट ऐसे शक्ति प्रदर्शन अपने जन्मदिन और पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की जयंती पर भी कर चुके हैं। आमतौर पर दो अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन कांग्रेस के कार्यकर्ता अपने क्षेत्रों में रह कर जिला और ब्लॉक स्तर पर गांधी प्रतिमा पर कार्यक्रम करते हैं, लेकिन इस बार सचिन पायलट ने प्रदेशभर के ब्लॉक अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष, विधायक, प्रमुख पदाधिकारियों को एक अक्टूबर को ही जयपुर बुला लिया है। एक अक्टूबर को गांधी जी पर कार्यशाला रखी गई है तथा दो अक्टूबर को जयपुर में पैदल मार्च होगा। यानि प्रदेशभर से कांग्रेस के प्रमुख पदाधिकारी अपने क्षेत्रों में नहीं रह कर जयपुर में प्रदेशाध्यक्ष पायलट के नेतृत्व में एकत्रित होंगे। यानि गांधी जयंती पर जिला और ब्लॉक स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों में कांग्रेस के प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित नहीं रहेंगे। चूंकि जयपुर के सभी कार्यक्रम प्रदेश कांग्रेस ने आयोजित किए हैं, इसलिए कार्यक्रमों में सचिन पायलट ही प्रमुख भूमिका में होंगे। पैदल मार्च भी पायलट के नेतृत्व में ही निकाला जाएगा। हालांकि इन कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी रहेंगे, लेकिन मुख्यमंत्री की भूमिका मूक दर्शक की होगी। असल में अब पायलट ने राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश प्रभारी अवनिाश पांडे की परवाह करना भी छोड़ दिया है। अब सभी कार्यक्रम पायलट अपने स्तर पर तय करते हैं। सूत्रों की माने तो पांडे ने पायलट से कहा था कि कांगे्रस में शामिल होने वाले छह बसपा विधायकों को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में बुलाकर सदस्यता दिलवाई जाए, लेकिन पायलट ने इंकार कर दिया। अब पायलट का कहना है कि एक अक्टूबर से जब सदस्यता अभियान चलेगा, तब बसपा के विधायक भी कांग्रेस की सदस्यता ले सकते हैं। कांग्रेस और सरकार के लिए यह हास्यास्पद बात है कि बसपा के जिन छह विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने कांग्रेस विधायक के तौर पर मान्यता दे दी , उन विधायकों ने अभी तक भी कांग्रेस की सदस्यता नहीं ली है। असल में अपनी रणनीति के तहत सीएम गहलोत ने छह बसपा विधायकों को कांग्रेस में शामिल करते समय कांग्रेस संगठन को अलग रखा था, इसलिए अब पायलट खफा हैं। पायलट के विरोध के चलते ही बसपा विधायकों को मंत्री नहीं बनाया जा रहा है। पायलट कह चुके हैं कि बसपा के विधायक मंत्री बनने के लिए नहीं आए हैं। ये विधायक बिना किसी स्वार्थ के अए हैं। जबकि प्रदेश प्रभारी पांडे का कहना है कि मंत्री बनाने का विशेषाधिकार मुख्यमंत्री के पास है। सवाल यह भी है कि क्या बसपा के विधायक सिर्फ विधायक रहने के लिए कांग्रेस में शामिल हुए हैं? साफ जाहिर है कि राजस्थान के सत्ता और संगठन में तालमेल नहीं है। हालांकि सरकार को मजबूती देने के लिए मुख्यमंत्री ने बसपा के सभी छह विधायकों को कांग्रेस में शामिल करवाया, लेकिन यह फैसला संगठन को ही रास नहीं आ रहा है। देखना है कि ताजा हालातों का जवाब मुख्यमंत्री गहलोत किस प्रकार देते हैं। वैसे अब पायलट के तेवर भी तीखे हैं। 


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