जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ही अपने पुत्र को आरसीए का अध्यक्ष नहीं बनवा पा रहे हैं तो कांग्रेस के साधारण कार्यकर्ता और आम आदमी की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।


जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ही अपने पुत्र को आरसीए का अध्यक्ष नहीं बनवा पा रहे हैं तो कांग्रेस के साधारण कार्यकर्ता और आम आदमी की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। 
वैभव गहलोत को राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन का अध्यक्ष बनवाने के लिए पिता और प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तथा राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष सीपी जोशी ने पूरी ताकत लगा रखी है। सरकार का पूरा अमला जोशी-गहलोत के इशारे पर काम कर रहा है। जोशी तो मौजूदा समय में खुद आरसीए के अध्यक्ष हैं और बीसीसीआई में जोशी की चलती है। लेकिन इसके बावजूद भी मुख्यमंत्री गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत आरसीए के अध्यक्ष नहीं बन पा रहे हैं। सरकार होने के बावजूद भी अभी तक चुनाव अधिकारी तय नहीं हो पाया है। गंदी राजनीति के चलते अब तक दो चुनाव अधिकारियों ने चुनाव करवाने से इंकार कर दिया है। यानि अभी तो मामला चुनाव अधिकारी पर ही अटका हुआ है। चुनाव के समय इतना घमासान होगा, यह समय ही बताएगा। वैभव गहलोत मुख्यमंत्री के पुत्र हैं, यह बात पता होने के बाद भी कांग्रेस पार्टी के ही दिग्गज रामेश्वर डूडी आरसीए के अध्यक्ष पद के दावेदार हैं। यानि वैभव गहलोत को अपनी ही पार्टी से चुनौती मिल रही है। यह तब है कि जब वैभव के पक्के समर्थक सीपी जोशी विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे हैं। कांग्रेस के अनेक नेताओं को लगता है कि अपनी सरकार होने के बाद भी चल नहीं रही है। यानि कोई सरकारी पद नहीं मिल रहा या फिर कोई काम नहीं हो रहा। ऐसी स्थिति बेचारे आम आदमी की भी है। राज बदलने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसे में नाराज और मायूस लोग वैभव गहलोत की घटना से सबक ले सकते हैं। जब मुख्यमंत्री ही अपने बेटे को आरसीए का अध्यक्ष बनवाने में सफल नहीं हो रहे हैं तो फिर साधारण कार्यकर्ता की क्या स्थिति होगी, अंदाजा लगाया जा सकता है। मुख्यमंत्री के समर्थक कह सकते हैं कि राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन की राजनीति से अशोक गहलोत का कोई सरोकार नहीं है। ऐसे समर्थक यह समझ लें कि यदि सीपी जोशी की ओर से वैभव गहलोत उम्मीदवार नहीं होते तो अब तक चुनाव हो जाते। प्रदेश के सहकारिता विभाग ने जिस तरह एक ही दिन में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त विनोद जुत्सी का नाम चुनाव अधिकारी के तौर पर बीसीसीआई को भिजवाया, उससे जाहिर है कि वैभव के मामले में सत्ता का कितना उपयोग हो रहा है। मुख्यमंत्री के बेटे के लिए इतना उपयोग करना तो वाजिब है। जहां तक अशोक गहलोत का सवाल है तो वे अपने बेटे की राजनीति को बहुत सोच समझ कर आगे बढ़ाते हैं। यदि उन्हें पता होता कि आरसीए में इतने लफड़े होंगे और रामेश्वर डूडी जैसे नेता खुली चुनौती देेंगे तो वे कभी अपने पुत्र का नाम आगे नहीं बढ़ाते। शायद गहलोत का मानना रहा कि सीपी जोशी आसानी से वैभव को आरसीए का अध्यक्ष बनवा देेंगे। चूंकि वैभव भी जोधपुर से लोकसभा चुनाव हार गए थे, ऐसे में राजनीति के जख्मों पर आरसीए अध्यक्ष का मरहम लग जाएगा। देखना है कि आरसीए की जंग कहां तक पहुंचती है। जानकारों का मानना है कि वैभव को आरसीए की जंग में उतार कर अशोक गहलोत बेवजह विवादों में आए हैं। 
अब आरआर रश्मि बने चुनाव अधिकारी:
विनोद जुत्सी के मना करने के बाद २६ सितम्बर को बीसीसीआई ने आरआर रश्मि को राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के चुनाव कराने के लिए चुनाव अधिकारी नियुक्त किया है। अब देखना है कि रश्मि की नियुक्ति के बाद रामेश्वर डूडी की क्या प्रतिक्रिया होती है। 


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