जियारत के लिए अजमेर आने वाले पाकिस्तानियों पर जब कोई शुल्क नहीं तो फिर करतारपुर साहब जाने वाले सिक्ख श्रद्धालुओ से सेवा शुल्क की वसूली क्यों।


जियारत के लिए अजमेर आने वाले पाकिस्तानियों पर जब कोई शुल्क नहीं तो फिर करतारपुर साहब जाने वाले सिक्ख श्रद्धालुओं से सेवा शुल्क की वसूली क्यों? यही है भारत और पाकिस्तान की मानसिकता में फर्क। 
करतारपुर स्थित गुरुद्वारे में जाने वाले सिक्ख श्रद्धालुओं से अब पाकिस्तान सेवा शुल्क लेने पर जोर देर रहा है। करतारपुर कोरिडोर के पूरा होने तथा भारत से करतारपुर जाने वाले श्रद्धालुओं को लेकर इन दिनों भारत और पाकिस्तान के बीच उच्चाधिकारियों के मध्य वार्ता का दौर चल रहा है। पाकिस्तान की ओर से जो शर्तें बताई जा रही है उन्हीं में कहा गया है कि सिक्ख श्रद्धालुओं से सेवा शुल्क की वसूली भी पाकिस्तान के द्वारा की जाएगी। हालांकि भारत के विदेश मंत्रालय ने सेवा शुल्क वसूलने पर साफ इंकार कर दिया है। भारत सरकार का कहना है कि सिक्ख समुदाय के लोग धार्मिक दृष्टि से करतारपुर साहब जा रहे हैं ऐसे में शुल्क वसूली करना उचित नहीं है। हालांकि श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर भी दोनों देशों के बीच विवाद बना हुआ है। पाकिस्तान का प्रस्ताव है कि एक दिन में पांच हजार से ज्यादा श्रद्धालु न आए। इन श्रद्धालुओं में सरकारी अधिकारियों के आने पर भी रोक लगाई गई। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के इस प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया है। एक ओर पाकिस्तान सिक्ख श्रद्धालुओं से सेवा शुल्क वसूलने की बात कर रहा है तो दूसरी ओर अजमेर स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में आने वाले पाकिस्तान के जायरीन से किसी भी प्रकार कर शुल्क नहीं लिया जाता है। सरकारी स्तर पर सालाना उर्स में पाकिस्तान से आने वाले जायरीन को तो अजमेर के पुरानी मंडी स्थित सेंट्रल गल्र्स स्कूल में ठहराया जाता है। पांच सौ से भी अधिक जायरीन कोई पांच दिनों तक इस स्कूल में नि:शुल्क ठहरते हैं। यानि प्रशासन की ओर से पाक जायरीन से कोई किराया नहीं लिया जाता, यह बात अलग है कि करीब दस दिनों तक स्कूल को बंद करना पड़ता है। प्रशासन की ओर से पाक जायरीन को अनेक प्रकार की सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जाती है। रेलवे स्टेशन से लाने ले जाने की व्यवस्था भी प्रशासन की ओर से नि:शुल्क की जाती है। पाक जायरीन दल पर प्रशासन के द्वारा लाखों रुपया खर्च किया जाता है। एक ओर भारत में पाक जायरीन को इतनी सुविधाएं दी जाती है तो दूसरी ओर करतारपुर साहब जाने वाले सिक्ख श्रद्धालुओं से सेवा शुल्क की वसूली की बात कही जा रही है। असल में भारत और पाकिस्तान की मानसिकता में यही फर्क है। भारत हमेशा पाकिस्तान के प्रति सद्भावना दिखाता है, जबकि पाकिस्तान भारत के श्रद्धालुओं के प्रति भी दुरभावना दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ता है। इसका ताजा उदाहरण करतारपुर साहब जाने वाले श्रद्धालुओं से सेवा शुल्क की वसूली का प्रस्ताव है। 


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