मोदी हउदी से पकिस्तान पर साझा, सर्जिकल स्टा्इक मोदी जी हउदी' से पकिस्तान पर साझा ..

मोदी हउदी' से पाकिस्तान पर साझा 'सर्जिकल स्ट्राइकमोदी हउदीसे पाकिस्तानपर साझा 'सर्जिकल स्ट्राइक




प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमरीकी धरतीसे पड़ोसी पार्किस्तान का नाम लिए बगैरजबरदस्ता हमला बोला। अमरीकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रंप के 'मुस्लिम आतंकवादको जड़ सेउखाड़ फेकने के जवाब में मोदी इमरान की'जेहादी साज़िशको बेनाक करते हुए करते हुएकहा, 'नाइन-इलेवन 'ट्वीन टावरहमला  ट्वेंटीसिक्स इलेवन 'मुंबईहमला के साजिशकर्ता एकही जगह मिलते है। इससे पहले अनुच्छेद ३७० को बेसर करते का जिक्र करते हुए कहाइससेउन्हें दिक्कत होती है जिनसे अपना देश नहींसंभल रहा। मतलब साफ है ट्रंप के सामने मोदी नेपाकिस्तान की ऐसी की तैसी कर दी। अब इसेसर्जिकल स्ट्राइक नहीं तो और क्या कहेंगे

सुरेश गांधी 

पूरी दुनिया में कश्मीर मुद्दे पर किरकिरी करवाचुका पाकिस्तान हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। संयुक्तराष्ट्र महासभा में जैसे ही पाकिस्तानी पीएम ने कश्मीर रागअलापा इमरान को जमकर खरी खोटी सुननी पड़ी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के ह्यूस्टन में संपन्न'हाउडी मोदी' समारोह में डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी मेंआतंकवाद को लेकर पाकिस्तान का नाम लिए बिनाजमकर लताड़ा। कहा, ये वो लोग हैं जो अशांति चाहते हैं,आतंक के समर्थक हैं। ९/११ और २६/११ केसाजिशकर्ता कहां पाये जाते हैं?, बताने की जरुरत नहीं।खासतौर से इस टिप्पणी की प्रासंगिताकता तब और बढ़जाती है जब पाकिस्तानी पीएम इमरान अमेरिका में ही होऔर खुद ट्रंप ने कहा है 'वे मुस्लिम आतंकवाद के खिलाफनिर्णायक लड़ाई लड़ने के लिए मोदी के साथ है'। ''हमनिर्दोष नागरिकों की कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकवाद केखतरे से रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।'' भारत और अमेरिकासमझते हैं कि अपने समुदाय को सुरक्षित रखने के लिएहमें अपनी सीमाओं की रक्षा करनी होगी। 

वैसे भी राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी द्वाराह्यूस्टन में ५०,००० भारतीय अमेरिकी लोगों को संबोधितकरना दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध के लिए अत्यंतमहत्वपूर्ण है। क्योंकि दोनों देशों के साझा मूल्य हैं औरस्वतंत्रता, आजादी तथा उदारता के लिए उनका प्रेम दोनोंदेशों को एक-दूसरे से जोड़ता है। खासकर पीएम मोदी केमंच पर अमेरिका राष्ट्रपति के आने को कूटनीतिक संबंधोंके लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जहां तकदुनिया में भारत के मुकाबले पाकिस्तान की साख कासवाल है इसका अंदाजा इसी से बात से लगाया जासकता है कि तो दूसरे के प्लेन से अमेरिका पहुंचे इमरानखान को रिसीव करने कोई अमेरिकी अधिकारी तक नहींपहुंचा, जबकि प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत में अमेरिका मेंरेड कार्पेट बिछाया गया। मोदी के स्वागत खुद वहां कीसबसे बड़ी हस्ती उद्योग जगत के सीइओं ने किया।मतलब साफ है सबकुछ ठीक रहा तो पाकिस्तान के जल्दचार टूकड़े होंगें। या यूं कहे 'हाउडी मोदी' पाकिस्तान केलिए तीसरी एयर स्ट्राइक साबित होगी। बेशक, एक तरफजहां भारत में गिरती अर्थव्यवस्था को लेकर विपक्षहमलावर है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कश्मीर मसले कोलेकर एटम की धमकी देते फिर रहे है। तो दुसरी तरफप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पूरी दुनिया में डंका बजा रहाहै। भारत से लेकर पूरी दुनिया में छाएं हिन्दुस्तानी उनकेकामों की सराहना करते नहीं थक रहे। खासकर हाउडीमोदी के बाद कांग्रेस के राहुल गांधी व पाकिस्तानीप्रधानमंत्री इमरान खान की होश पाख्ता हो गए है। साखबचाने के लिए जहां राहुल गांधी जहां अर्थव्यवस्था कोरोना रो रहे है, वहीं इमरान कश्मीर कश्मीर अलाप रहे है।लेकिन मोदी है कि दोनों का कोई फर्क ही नहीं पड़ता। बता दें, इमरान ट्रंप से मिलने वाले है। इस बयान के बाददोनों के बीच क्या बात होगी ये तो वे ही जाने लेकिनइतना तो तय है कि मोदी ने पाकिस्तान की जमकरबखियां उधेड़ी है। इसका पूरा देश स्वागत कर रहा है।जाहिर है इसका असर महाराष्ट्र एवं हरियाणा के चुनाव परभी पड़ेगा। वैसे भी आतंक के खिलाफ अमेरिका ही नहींरुस, इजरायल, जापान समेत पूरी दुनिया मोदी के साथ है।कहा जा सकता है 'हाउडी मोदी' की अपार सफलता केबाद अब मोदी और ट्रंप एक साथ मिलकर पेश करेंगे'राउडी इमरान'। मोदी मानते है कि वे किसी दूसरे से नहींबल्कि खुद से मुकाबला कर रहे हैं। वे अपने को बदल रहेहैं क्योंकि भारत में 'विकास' आज सबसे चर्चित शब्द बनगया है। धैर्य हम भारतीयों की पहचान है लेकिन अब हमविकास के लिये अधीर हैं। जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाखके लोगों को विकास और समान अधिकार से जिस तरहसे ३७० की आड़ में वंचित रखा था। उसका लाभआतंकवादी और अलगाववादी उठा रहे थे। लेकिन ३७० हटने के बाद संविधान ने जो अधिकार भारत को दिए हैं,वही अधिकार अब जम्मू एवं कश्मीर को मिल गया है।वहां की महिलाओं और दलितों के साथ हो रहा भेदभावअब खत्म हो गया है। 

देखा जाएं तो स्टेज पर एंट्री से लेकर एक्जिटतक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे जोश में रहे और हर मोर्चेपर उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप की अगवानी की। फिर चाहे स्टेजपर ट्रंप का अपने ही अंदाज में परिचय करवाना हो याफिर कार्यक्रम के अंत में ट्रंप का हाथ पकड़ पूरे मैदान काचक्कर लगाना हो। २००४ से लेकर अभी तक प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी की विदेश नीति कई बार चर्चा में रही है। विपक्षपीएम मोदी की विदेश नीति पर सवाल खड़े करता रहा है,लेकिन प्रधानमंत्री बिना रुके अपने मिशन पर आगे बढ़तेरहे। पीएम मोदी ने विपक्ष नीति में राष्ट्राध्यक्षों के साथपर्सनल टच पर जोर दिया। हाउडी मोदी कार्यक्रम में भीऐसा ही दिखा, भाषणों से इतर डोनाल्ड ट्रंप-नरेंद्र मोदी केबीच की केमेस्ट्री पर हर किसी की नज़र रही। अब यूं तोडोनाल्ड ट्रंप को पूरी दुनिया ही जानती है लेकिन फिर भीमोदी ने अपने अंदाज में उनका परिचय करवाया।प्रधानमंत्री बार-बार हाथ से इशारे करते, डोनाल्ड ट्रंप कीओर हाथ करते और फिर भीड़ की ओर देखते हुए बातकरते। जनता के साथ संवाद के मामले में हर कोई नरेंद्रमोदी का कायल है, यहां तक कि विपक्षी नेता भी इसकीतारीफ करते हैं कि नरेंद्र मोदी एक शानदार वक्ता हैं। इसीका नज़ारा ह्यूस्टन में दिखा, जब स्टेडियम में बैठे ५० हजार से अधिक लोगों से पीएम ने सीधे संवाद किया।पीएम अपनी ही शैली में लोगों से जुड़ते गए और माहौलजोशीला होता गया। 

करीब ५० मिनट का भाषण देने के बाद जबप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच से नीचे उतरे तो कुछ ऐसा हुआकि हर कोई हैरान हो गया। मोदी मंच से नीचे उतरे, सीधेडोनाल्ड ट्रंप के पास पहुंचे और उनसे मिलकर दर्शकों कीओर बढ़ गए। पीएम मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप का हाथ पकड़ाऔर उनसे कहा कि चलिए, मैदान का चक्कर लगाते हैं।शायद इसके लिए डोनाल्ड ट्रंप भी तैयार नहीं थे और नही उनकी सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मी। लेकिन मोदी आगेबढ़े और डोनाल्ड ट्रंप के साथ मैदान का चक्कर काटनेलगे, दोनों नेताओं ने स्टेडियम में बैठी जनता काअभिवादन स्वीकार किया। मंच पर दोनों नेताओं कीदोस्ती, स्टेडियम में भारतीय समुदाय के लोगों का जोशदेखने लायक था। ३० मिनट के भाषण में डोनाल्ड ट्रंपऔर ५० मिनट से अधिक के भाषण में पीएम नरेंद्र मोदी नेकई ऐसी बातें कीं, जो भारत-अमेरिका की दोस्ती को नएमुकाम पर ले गई हैं। खासकर मोदी ने भारत के विकासकार्यो को दुनिया के सामने रखा और बताया कि भारतसरकार आसान जीवनशैली की दिशा में काम कर रही है।५ साल में ६० फीसदी लोगों के पास बैंक खाते हैं। गैसकनेक्शन ५५ से ९५ फीसदी तक लोगों को मिल गया है।१० हजार से ज्यादा सरकारी सुविधाएं ऑनलाइनउपलब्ध हैं। पहले टैक्स रिफंड आने में महीनों लग जातेथे, लेकिन अब १० दिनों में रिफंड सीधे खाते में चलाजाता है। 

ऊर्जा के क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीचसहयोग को विस्तार देने के उद्देश्य से हुई इस बैठक केबाद भारतीय कंपनी पेट्रोनेट और अमेरिकी कंपनीटेल्यूरियन के बीच अहम समझौते की घोषणा हुई। दोनोंकंपनियों में एलएनजी को लेकर समझौता हुआ।टेल्यूरियन और पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड के बीच एकएमओयू साइन किया गया। इसके तहत पीएलएलअमेरिका से सालाना ५० लाख टन लिक्विफाइड नैचरलगैस (एलएनजी) का आयात करेगी। समझौते के मुताबिकअमेरिकी कंपनी ५ मिलियन टन एलएनजी सप्लाईकरेगी। बैठक में १७ वैश्विक ऊर्जा कंपनियों के मुख्यकार्यकारी अधिकारी शामिल हुए। इन कंपनियों कीउपस्थितिक १५० देशों में है और इनका सामूहिक नेटवर्थ १,००० अरब डॉलर है। कंपनी की ओर से कहा गया थाकि इसमें प्रस्तावित एलएनजी टर्मिनल के साथ हीप्राकृतिक गैस उत्पादन, एकत्रीकरण, प्रसंस्करण औरपरिवहन सुविधाएं शामिल हैं। भारत पहले एलएनजी केलिए केवल कतर पर निर्भर था। अब अमेरिका के साथ हीरूस और ऑस्ट्रेलिया से भी एलएनजी का आयात हो रहाहै। 

हो जो भी हकीकत तो यही है कि भारतीयप्रधानमंत्री की ह्यूस्टन सभा भी दुनिया को भारत की ओरन केवल आकर्षित करने वाली, बल्कि उनके नजरिये कोभी बदलने वाली साबित हुई है। मोदी ह्यूस्टन में हिंदुस्तानकी शक्ति और सामर्थ्य के साथ देश के सवा अरब लोगों केनए सपनों और नए भारत की गूंज से विश्व को अचंभितकर दिया है। खासतौर से भारत-अमेरिका दोस्ती का असरचीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग यात्रा पर भी पड़ेगा। क्योंकिचीन ने न केवल कश्मीर के मामले में अनावश्यक रूप सेप्रकटतया पाकिस्तान का साथ दिया, बल्कि इस मामलेको संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में भी ले गया। चीन के साथन केवल हमारे सीमा संबंधी विवाद हैं, बल्कि आयात-निर्यात में भी अनेक महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जिनसे भारत कोगहरी आर्थिक क्षति होती है। जब चीन सामरिक चुनौती केरूप में सामने हो तो ह्यूस्टन सभा का महत्व और बढ़जाता है।

मोदी की ह्यूस्टन सभा में अमेरिकी राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रंप की सहभागिता गहरे कूटनीतिक औरसामरिक अर्थ हैं। ट्रंप को भी ह्यूस्टन सभा में शामिल लाभहोने का लाभ होगा ही। अगले वर्ष होने वाले राष्ट्रपतिचुनावों में ट्रंप भारतीय समुदाय के समर्थन का भरपूरउपयोग करना चाहेंगे। पूरी दुनिया में इस सभा का बहुतगहरा असर होने वाला है। पाकिस्तान पहले से ज्यादामुस्लिम देशों और साथ ही पश्चिमी देशों के मध्य अलग-थलग हो जाएगा। उसे इसका अहसास जितनी जल्दी होजाए तो अच्छा कि आखिर वह केवल चीन के भरोसे कबतक चलेगा? दुनिया उस पर भरोसा नहीं कर रही है। इसीकारण उसे हर वैश्विक मंच पर मात खानी पड़ रही है।संयुक्त राष्ट्र के हाल के आंकड़े के अनुसार दुनिया केविभिन्न देशों में डेढ़ करोड़ से अधिक भारतीय प्रवासी रहरहे हैं। प्रवासियों की संख्या की दृष्टि से भारतीय सबसेआगे हैं। ह्यूस्टन की सभा से दुनिया के विभिन्न देशों मेंरहने वाले भारतीयों की पहचान को बल तो मिला ही,उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाया है। विदेश स्थितभारतीयों का कद अपने-अपने देश में बढ़ने का सीधाअसर उनकी अपनी आर्थिक स्थिति में नए अवसरों कीउपस्थिति के रूप में हो सकता है। 

भारत में लाखों फर्जी कंपनियों को फेयरवेलदिया जा चुका है, हजारों बेकार कानूनों को फेयरवेल दियाजा चुका है। जिस चीज का लोगों को ७० साल से इंतजारथा, उस अनुच्छेद ३७० को जम्मू-कश्मीर से भी फेयरवेलदिया जा चुका है। कुछ लोग हैं, जो अशांति चाहते हैं औरआतंक को पालते-पोसते हैं। उनकी पहचान पूरी दुनियाअच्छी तरह जानती है। भारत आज चुनौतियों को टालनहीं रहा है, उनसे टकरा रहा है। भारत आज थोड़े बहुतइनक्रिमेंटल चेंज पर नहीं, समस्याओं के संपूर्ण समाधानपर जोर दे रहा है। असंभव लगने वाली बातों को आजभारत संभव करके दिखा रहा है। मोदी की, ''वो जो सामनेमुश्किलों का अंबार है, वही तो मेरे हौसलों की मीनार है''खूब सराहा गया।  इस दो अक्टूबर को जब देश महात्मागांधी की १५० जन्म जयंती मनाएगा, तो भारत खुले मेंशौच को फेयरवेल दे चुका है। ट्रंप ने भी मोदी के बातों परमुहर लगाते हुए कहा, भारत में पीएम मोदी बहुत अच्छाकाम कर रहे हैं। भारत का मुझसे अच्छा दोस्त कोईअमेरिकी राष्ट्रपति नहीं रहा। मोदी के कार्यकाल में दुनियाभारत को एक मजबूत देश के रूप में देख रही है। 

मोदी के नेतृत्व में भारत मजबूत हो रहा है। सीमासुरक्षा के लिए दोनों देश साथ काम करेंगे। अवैध प्रवासीहमें बिल्कुल स्वीकार नहीं हैं। हमें अमेरिका के लोगों केहित में काम करना है। बॉर्डर की समस्या सिर्फ भारत हीनहीं, अमेरिका के लिए भी है। दोनों देश इसी को लेकरकाम कर रहे हैं। हम चरमपंथी इस्लामिक आतंकवाद सेनिर्दोष लोगों को मिलकर बचाएंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंपने कहा, 'हम भारतीय-अमेरिकी लोगों को कट्टरपंथीइस्लामी आतंकवाद के खतरे से बचाने के गर्व से साथखड़े हैं।' अंतरिक्ष में सहयोग बढ़ाने पर हम मिलकर कामकर रहे हैं। रक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देश सहयोग बढ़ा रहेहैं। भारत और अमेरिकी सेनाओं ने हाल ही में साथ मेंसैन्य अभ्यास भी किया है। ट्रंप ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी, मैं आपके साथ दोनों देशों को और समृद्ध बनाने केलिए काम करना चाहता हूं, भारतीय कंपनियां अमेरिका मेंहजारों लोगों को नौकरी दे रही हैं। साथ ही अमेरिका मेंअभूतपूर्व निवेश हो रहा है। भारत भी यहां निवेश कर रहाहै और हम भी भारत में ऐसा ही कर रहे हैं।' 

हाउडी मोदी के कार्यक्रम में इंडियन मुस्लिम एसोसिएशनके सदस्य भी मौजूद रहे। उनका कहना है कि वो पीएममोदी से काफी आशान्वित है। ह्यूस्टन में मोदी ने कश्मीरीपंडितों से मुलाकात की। पीएम मोदी से मिलते हुएकश्मीरी पंडित भावुक हो गए। उन्होंने मोदी सरकार द्वाराजम्मू-कश्मीर के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की।इसके लिए पीएम मोदी को धन्यवाद दिया। कश्मीरीपंडितों से मुलाकात के दौरान डिलिगेशन के एक सदस्य नेपीएम मोदी के हाथ चूमते हुए कहा कि ७ लाख कश्मीरीपंडितों की ओर से शुक्रिया अदा करते हैं। वहीं, पीएममोदी ने कहा कि उन लोगों ने जो कष्ट झेले वो भी कमनहीं हैं। 

बता दें, सिंधी, बलोच और पख्तून समूह केप्रतिनिधि ह्यूस्टन पहुंचे हैं। ये लोग पाकिस्तान से आजादीकी मांग कर रहे हैं। इनका कहना है कि जिस तरह से१९७१ में भारत ने बांग्लादेश की आजादी में मदद की, हमवैसे सिंध के लिए अलग देश चाहते हैं। समुदाय का माननाहै कि यह कार्यक्रम दर्शाता है कि कश्मीर को लेकर भारतकी नीति का अमेरिका समर्थन करता है। सिख समुदाय केलोगों ने पीएम मोदी को भारत सरकार द्वारा लिए गएफैसलों पर बधाई दी और एक ज्ञापन सौंपा। सिखसमुदाय के लोगों ने पीएम मोदी को ज्ञापन सौंपते हुए1984 के सिख दंगों, दिल्ली एयरपोर्ट का नाम गुरु नानकदेव के नाम पर करने, भारतीय संविधान के अनुच्छेद २५और आनंद मैरिज एक्ट, वीजा एवं पासपोर्ट जैसे मुद्दों परबोलने का अनुरोध किया। इस दौरान कैलिफोर्निया केअरविन के कमिश्नर अविंदर चावला ने कहा कि सिखसमुदाय के लिए किए कामों और करतारपुर कॉरिडोर केलिए धन्यवाद दिया है।  

लेकिन अफसोस है कि एक तरफ जहां भारतका गौरव पूरी दुनिया में बढ़ रहा है वहीं कांग्रेस समेत पूरेविपक्ष को यह सब रास नहीं आ रहा है। संकीर्णराजनीतिक कारणों से वे सिर्फ मोदी विरोध में ही उलझेहै। जबकि मोदी ने एक रिफॉर्मिस्ट के रूप में न सिर्फराजनीति को नई दिशा प्रदान की बल्कि आर्थिक सुधारोंके साथ-साथ दशकों से चली आ रही समस्याओं कास्थायी समाधान निकालकर सभी को गौरवान्वित कियाहै। ग्रामोदय से भारत उदय तक, आयुष्मान भारत सेकिसान सम्मान निधि तक, धारा ३७० से तीन तलाक कीकुप्रथा हटाने तक मोदी के हर निर्णय ने भारत औरभारतीय लोकतंत्र को मजबूती प्रदान की है। या यूं कहेमोदी के नेतृत्व में देश गौरव की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाहै। उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति, निर्णायक नेतृत्व और अथकपरिश्रम से देश का हर नागरिक गौरवान्वित है। उनकेनेतृत्व में उभरते नए भारत ने विश्व में एक मजबूत,सुरक्षित और विश्वसनीय राष्ट्र के रूप में अपनी पहचानबनाई है।   


 


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