आखिर चुनाव लडना ही पड़ेगा सीएम के पुत्र वैभव गहलोत को, किक्रेट की सियासत में कांग्रेस की जंग सड़क पर।


सीएम के पुत्र वैभव गहलोत को आखिर चुनाव लडऩा ही पड़ेगा। 
क्रिकेट की सियासत में कांग्रेस की जंग सड़क पर।


२ अक्टूबर को राजस्थान क्रिकेट एसोसिशन के चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए डूडी ने भी नामांकन दाखिल कर दिया है। डूडी के समर्थकों ने उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव और कार्यकारिणी के सदस्यों के पद के लिए भी नामांकन किया है। चूंकि डूडी के अध्यक्ष वाले नागौर जिला क्रिकेट संघ को अयोग्य माना जा रहा है। डूडी का नामांकन खारिज हो जाएगा। इस स्थिति को समझते हुए ही डूडी ने जोधपुर जिला संघ के रामप्रकाश चौधरी का नामांकन भी दाखिल करवा दिया है। चौधरी के नामांकन के बाद अब आरसीए के चुनाव करवाने ही पड़ेंगे। यानि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत निर्विरोध अध्यक्ष नहीं बन पाएंगे। वैभव गहलोत को तो मौजूदा अध्यक्ष सीपी जोशी के गुट का बहुमत है, इसलिए चुनाव में वैभव की जीत तय मानी जा रही है, लेकिन वहीं क्रिकेट की सियासत में कांग्रेस की जंग सड़कों पर आ गई है। वैभव गहलोत की आड़ में मुख्यमंत्री गहलोत को चुनौती देने वाले रामेश्वर डूडी कोई छोटे नेता नहीं है। गत भाजपा के शासन में डूडी विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता रहे और मौजूदा समय में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और डिप्टी सीएम सचिन पायलट के समर्थक माने जाते हैं। सूत्रों की माने तो कांग्रेस के एक गुट का समर्थन होने की वजह से ही डूडी खुले आम मुख्यमंत्री और सरकार के कृत्य की आलोचना कर रहे हैं। आरसीए में भले ही सीपी जोशी गुट का बहुमत हो, लेकिन चुनाव की प्रक्रिया को कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। कानूनी आधार तैयार करने के लिए ही बीसीसीआई द्वारा नियुक्त लोकपाल जास्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा के समक्ष डूडी ने अपील दायर की है। इस अपील में चुनाव अधिकारी आरआर रश्मि के फैसले को चुनौती दी गई। वहीं डूडी के नागौर सहित अलवर और श्रीगंगानगर के जिला संघों को भी अयोग्य घोषित कर दिया। आरोप लगाया गया कि ये तीनों जिला संघ क्रिकेट के बदनाम ललित मोदी गुट से जुड़े हुए हैं। बीसीआई ने मोदी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है। हालांकि डूडी के ललित मोदी से जुडऩे का कोई सबूत चुनाव अधिकारी के पास नहीं है। ऐसे में डूडी के जिला संघ को अयोग्य घोषित करने को लेकर चुनौती दी जा सकती है। लोकपाल जस्टिस मिश्रा ने भी कुछ इसी तरह के निर्देश चुनाव अधिकारी रश्मि को दिए हैं, अब देखना होगा कि लोकपाल के निर्देश चुनाव अधिकारी मानते है या नहीं। २ अक्टूबर को जिस तरह जयपुर में आरसीए के दफ्तर के बाहर हंगामा हुआ उससे जाहिर है कि कांग्रेस के नेताओं की आपसी लड़ाई सड़क पर आ गई है। डूडी ने अपनी ही सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं नागौर के सांसद और आरएलपी के संयोजक हनुमान बेनीवाल का कहना रहा कि रामेश्वर डूडी  की राजनीति को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। बेनीवाल पहले ही डूडी के प्रति अपना समर्थन जता चुके हैं। क्रिकेट की सियासत की वजह से कांग्रेस को मंडावा और खींवसर के उपचुनावों में भारी नुकसान हो सकता है। दोनों ही क्षेत्र जाट बहुल्य माने जाते हैं। 


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