अफसरों और ठेकेदार की मनमानी से शहर के लोग परेशान, यूंही अजमेर में बनेगा एलीवेटेड रोड।


जब राजनीतिक नेतृत्व शून्य होगा, तब अजमेर में ऐसे ही बनेगा ऐलीवेटेड रोड। 
अफसरों और ठेकेदार की मनमानी से शहर के लोग परेशान।
कोई सुनने वाला नहीं। 
यह तो नहीं कहा जा सकता है कि अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त स्मार्ट सिटी अजमेर में पोपाबाई का राज है, लेकिन जब राजनीतिक शून्यता होती है, तब आमजन की समस्याओं का समाधान नहीं होता। यूं तो जिला प्रशासन ने जगह जगह स्मार्ट सिटी के बोर्ड लगा रखे हैं, लेकिन शहर की दुर्दशा की वजह से ऐसे बोर्ड अब प्रशासन का ही मजाक उड़ा रहे हैं। इन दिनों शहर के प्रमुख मार्ग कचहरी रोड, स्टेशन रोड, पीआर मार्ग आदि पर ऐलीवेटेड रोड का काम चल रहा है। यदि अजमेर में राजनीतिक सक्रियता होती तो ऐलीवेटेड रोड का कार्य व्यवस्थित होता। अफसरों और ठेकेदार की मिली भगत ने शहर को परेशानी में डाल रखा है। अच्छा होता है कि पहले किसी एक मार्ग का काम पूरा किया जाता ओर फिर इस मार्ग पर यातायात को सुचारू बनाने के बाद दूसरे मार्ग पर ऐलीवेटेड रोड के पिलर बनाने का कार्य किया जाता। अभी सभी मार्गों पर एक साथ खढ्ढे खोदने पिलर बनाने आदि के कार्य किए जा रहे हैं, जिससे शहर की ट्रेफिक व्यवस्था भी बिगड़ी हुई है। आम आदमी की परेशानी से किसी को कोई सरोकार नहीं है। यातायात पुलिस जब चाहे तब यातायात में बदलाव कर देती है। आए दिन कई घंटों का जाम इन मार्गों पर लग रहा है। मेडिकल कॉलेज की ओर से आने वाले यातायात को अग्रसेन सर्किल से गुजरने की बजाए सूचना केन्द्र के मुख्य द्वारा से मुडऩे की व्यवस्था लागू की गई है। लेकिन सूचना केन्द्र के बाहर अवैध तौर पर वाहन खड़े रहते हैं, जिससे वाहनों को मोडऩे में भारी परेशानी होती है। समझ में नहीं आता कि सूचना केन्द्र के बाहर अवैध तौर पर खड़े वाहनों को हटाने के लिए यातायात पुलिस किस अधिकारी के आदेश का इंतजार कर रही है। इतनी समझ तो ट्रेफिक पुलिस के एक सिपाही को भी होनी ही चाहिए। यह बात अलग है कि इस मार्ग से रोजाना पुलिस के बड़े अधिकारी गुजरते हैं। 
राजनीतिक शून्यता:
अजमेर शहर के दोनों विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के विधायक वासुदेव देवनानी और श्रीमती अनिता भदेल हैं। लेकिन राज्य में कांग्रेस की सरकार होने की वजह से इन दोनों विधायकों की प्रशासन में सुनने वाला कोई नहीं है। दिखाने के लिए देवनानी विधानसभा में सवाल लगाते हैं, लेकिन इन सवालों का असर प्रशासन के किसी भी अधिकारी पर नहीं होता। कई बार देवनानी अधिकारियों से मिलते भी हैं, लेकिन कांग्रेस सरकार के अधिकारी भाजपा के विधायको ंको कोई तवज्जों नहीं देते हैं। एक ओर भाजपा विधायकों की कोई सुनवाई नहीं हो रही तो कांग्रेस के नेता अपनी ही सरकार में उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय जैन ने बकायदा बयान जारी कर अजमेर की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर चिंता जताई है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार में कांग्रेस के नेताओं की स्थिति कैसी है। ऐसा नहीं कि बिगड़ी कानून व्यवस्था पर सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं पहली बार बयान दिया हो, इससे पहले भी पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर को ज्ञापन दिए जा चुके हैं। लेकिन अधिकारियों को भी पता है कि अजमेर के नेताओं में कोई दम नहीं है, इसलिए कार्यवाही नहीं की जाती। हालांकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस प्रत्याशियोंको ही विधायक मानने के निर्देश दे रखे हैं। इसलिए लिहाज से कांग्रेस सरकार में उत्तर क्षेत्र से महेन्द्र सिंह रलावता और दक्षिण क्षेत्र से हेमंत भाटी विधायक की भूमिका में माने जा रहे हैं, लेकिन ये दोनों नेता या तो तबादलों की सिफारिश करने में व्यस्त हैं, या फिर हारने के बाद भी अभी तक अपना स्वागत सम्मान करवाने में लगे हुए हैं। कांग्रेस के एक नेता ने तो शिक्षक संघ के सम्मेलन के फ्लेक्स तक लगवा दिए हैं। इससे जाहिर होता है कि कांग्रेस के नेता जनसमस्याओं के समाधान के बजाए स्वयं को लोकप्रिय करने में लगे हुए हैं। यूं कांग्रेस की ओर से अजमेर जिले का नेतृत्व केकड़ी के विधायक और प्रदेश के चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा करते हैं। लेकिन रघु शर्मा प्रदेशभर की चिकित्सा व्यवस्था को सुधारने में लगे हुए हैं। इसलिए अपने गृह जिले की ओर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। जहां तक कांग्रेस के दूसरे विधायक राकेश पारीक का सवाल है तो पारीक का ज्यादा समय जयपुर में गुजरता है। पारीक सेवादल के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। इसलिए अब उन्हें विधायक का पद बहुत छोटा नजर आता है। मसूदा विधानसभा क्षेत्र के लोगों को अपने विधायक राकेश पारीक से मुलाकात करने के लिए जयपुर ही जाना होता है। 


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