बुलंदशहर हिंसा में शहीद इंस्पेक्टर सुबोध के हत्यारोपी सुमित की लगी गांव में मूर्ति, प्रशासन बना मूकदर्शक।


बुलंदशहर हिंसा में शहीद इस्पेक्टर सुबोध के हत्यारोपी सुमित की लगी गाव में मूर्ति, प्रशासन बना मूकदर्शक






बुलंदशहरः गौरक्षा के नाम पर हिंसा और फिर हिंसा के आरोपी अभियुक्तों का महिमा मंडन आपने बहुत सुना होगा। अख़लाक़ से लेकर पहलू खान तक के मामले में एक अलग सोच के लोगो ने आरोपियों का फुल मालाओ के साथ स्वागत किया था। ऐसे ही भीड़ को हिंसक रूप देने के बाद एक इमानदार कर्तव्यनिष्ठ पुलिस इस्पेक्टर सुबोध कुमार की हत्या प्रकरण में नामज़द गिरफ्तार अभियुक्तों की रिहाई के समय भी देखने को मिला। अब इन सबसे भी थोडा आगे निकल कर उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में कथित रूप से गोकशी को लेकर हुई हिंसा के दौरान मारे गए युवक सुमित के परिजनों ने उसकी प्रतिमा का निर्माण कराया है।


गौरतलब हो कि बुलंदशहर जिले के स्याना कोतवाली में तीन दिसंबर २०१८ को कथित गोकशी को लेकर हिंसा भड़की थी। इस दौरान स्याना थाने के प्रभारी इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की हत्या कर दी गई थी। वहीं, हिंसा के दौरान गोली लगने से २० साल के सुमित की मौत हो गई थी। हिंसा के मामले में पुलिस ने मृतक सुमित को भी आरोपी बनाया था। अब सुमित के घरवालों ने चिंगरावठी में ही उसकी मूर्ति लगाई है, जिस पर 'गोरक्षक वीर शहीद चौ। सुमित दलाल धाम' लिखा है


द हिंदू ने अपनी एक रिपोर्ट में इस मूर्ति का फोटो भी प्रकाशित किया है। उसके मुताबिक, परिजनों ने घटना की सीबीआई जांच कराने की करते हुवे सुमित के पिता अमरजीत सिंह ने ऐसा न होने पर हिंदू धर्म छोड़ने की धमकी दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर उत्तर प्रदेश सरकार हमारी मांगों को नहीं मानती है तो मैं धर्म परिवर्तन कर लूंगा और तीन दिसंबर को आत्महत्या कर लूंगा। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कई बार मुलाकात कर चुके हैं। उन्होंने अपने बेटे के बेगुनाह होने का दावा भी किया, लेकिन सरकार ने उनके बेटे को शहीद का दर्जा नहीं दिया। ऐसे में उन्होंने सुमित को गोरक्षक शहीद का दर्जा देकर उसकी मूर्ति स्थापित कराई है। मालूम हो कि इससे पहले सुमित के परिवारवाले न्याय की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए थे और इसे लेकर परिजनों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। परिजनों का कहना था कि मुख्यमंत्री ने उन्हें एक सरकारी नौकरी, पचास लाख रुपये की आर्थिक मदद का आश्वासन दिया था। प्रशासन के ढुलमुल रवैये के कारण परिजन नाराज हैं।