एक ऐसा महापौर जो अपने शासन काल में सम्पूर्ण मानदेय की राशि गुप्त दान कर दिया।









अजब - गजब राजनीतिक एवं प्रशासनिक  शासन की ओर से पांच साल के कार्यकाल के लिए मिली मानदेय की सम्पूर्ण राशि जगदलपुर (छत्तीसगढ़) के महापौर जतिन जायसवाल ने शासन द्वारा संचालित कुछ मान्यता प्राप्त सामाजिक संस्थाओं को दान कर दी। जैसे ही निगम के पार्षदों और शहरसियों को महापौर के इस निर्णय का पता चला तो सभी ने उन्हें बधाई दी।जानकारी के मुताबिक जतिन जायसवाल ने पांच साल पहले महापौर चुने जाने के बाद से शासन की ओर से मिलने वाली न तो मानदेय राशि ली और न ही अन्य सुविधाएं ही स्वीकार की।किंतु शासन के नियमानुसार कार्यकाल समाप्त होने से पहले मानदेय राशि लेने की बाध्यता के चलते उन्होंने यह राशि लेते ही निगम आयुक्त से अनुरेध किया कि, वह सारी राशि सामाजिक कल्याण से जुड़ी संस्थाओं को दान स्वरूप प्रदान कर दें। जिसे स्वीकार कर राशि संस्थाओं को जारी करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।उल्लेखनीय है कि सादगी पसंद तथा प्रचार-प्रसार से दूर रहने वाले जतिन जायसवाल ने यह दान भी गुप्त रखा था किंतु, शुक्रवार आठ नवंबर को निगम की विशेष सामान्य सभा में किसी कर्मचारी ने उनकी इस पहल की जानकारी सार्वजनिक कर दी।इसके बाद पार्षदों के ओर से महापौर को बधाई देने का तांता लग गया, अब तो पूरे देश से उनको कांग्रेस ही नहीं दूसरे दलों के नेताओं द्वारा भी उनकी प्रशंसा करने की खबरें हैं। अब तक युवा उद्यमी जतिन जायसवाल की पहचान सरल व सहज स्वाभाव के नेता के रूप में है। वह शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।



इन संस्थाओं को मिलेगी दान:
जानकारी के अनुसार मानदेय की राशि शासकीय मान्यता प्राप्त संस्थानों जिनमें वृद्धाआश्रम, स्कूल, अंध मूक विद्यालय आदि को दान की गई है।इसमें बस्तर विकलांग सेवा समिति को 2.50 लाख रुपये, अस्थि बाधितार्थ बालगृह को 1.50 लाख, दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ विद्यालय को 1.50 लाख, आस्था निकुंज वृद्धा आश्रम को 1.50 लाख, नगर निगम द्वारा संचालित बाल मंदिर स्कूल को एक लाख, नगर पालिका निगम कर्मचारी संघ को 1.50 लाख रूपये मिलेंगे।                          अब नही लड़ेंगे चुनाव: जतीन जायसवाल अगला निगम चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। पत्रकारों से चर्चा में उन्होंने कहा कि वे ही नहीं उनके परिवार का अन्य कोई सदस्य भी चुनाव नही लड़ रहा है।