हर नाकाम वादा रेप नहीं हों सकता, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया।

ऐसे शारीरिक संबंध दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आते जिसमें महिला और पुरुष दोनों की सहमति हो। इसके अलावा महिला ने यह जानते हुए शारीरिक संबंध बनाया कि भविष्य में दोनों की शादी नहीं हो सकती अपराध नहीं हो सकता है। महिला इस आधार पर पुरुष के खिलाफ शादी का झूठा वादा कर दुष्कर्म का आरोप नहीं लगा सकती है। एक याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ये बाते कहीं।




हर नाकाम वादा रेप नहीं हो सकता है

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, शादी का हर नाकाम वादा रेप नहीं हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, कानून के तहत ऐसे मामलों में पुरुष रेप का आरोपी तभी हो सकता है जिसमे यह साबित हो जाए कि पुरुष ने शादी का झूठा वादा कर महिला के साध शारीरिक संबंध स्थापित किए।

दोनों ने सहमति के आधार पर बनाए संबंध

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और इंदिरा बनर्जी की अध्यक्षता वाली पीठ ने सेल्स टैक्स की सहायक आयुक्त द्वारा सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट के खिलाफ दर्ज कराए गए दुष्कर्म के मामले को खारिज कर दिया। दोनों बीते छह साल से ज्यादा वक्त तक एक दूसरे के साथ रहे और कई बार एक-दूसरे के घर मे भी रहे। कोर्ट ने कहा इससे पता चलता है कि दोनों ने आपसी सहमति के आधार पर संबंध बनाए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट की स्थिति

सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह के मामले में कानून की स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा, हर मामले में पुरुषों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। कोर्ट ने कहा, एक वादे के बावजूद किसी महिला से शादी करने से विफलता उसके किसी अपराध को साबित नहीं करता है। कोर्ट ने कहा, ऐसे मामलों में अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होगा कि पुरुष ने गलत मंशा से किसी महिला से शारीरिक संबंध बनाए थे।

शिकायतकर्ता ने ये की थी शिकायत

दरअसल शिकायतकर्ता सीआरपीएफ अधिकारी को 1998 से जानती हैं। उन्होंने आरोप लगाया की शादी का वादा करके उनके साथ 2008 में शारीरिक संबंध बनाए गए। इसके बाद दोनों का रिश्ता 2016 तक रहा इस दौरान दोनों एक दूसरे के घर में भी रहे। इस दौरान 2014 में सीआरपीएफ अधिकारी ने महिला की जाति को लेकर शादी करने को लेकर चिंता जताई थी, बावजूद इसके दोनों के रिश्ते जारी रहे।

शिकायतकर्ता ने 2016 में उस वक्त शिकायत दर्ज कराई जब उसे पता चला कि जिसके साथ उसके संबंध हैं उसने किसी और के साथ सगाई कर ली है। इस मामले में पीठ का कहना है कि शिकायतकर्ता को पता था कि उससे जो झूठा वादा किया गया उसे तोड़ा जा सकता है। उससे एक अच्छी नीयत से वादा किया जिसे कि बाद में पूरा नहीं किया गया।

कोर्ट ने कहा

अदालत ने कहा, 'यहां शादी का वादा झूठा था और वादा करते हुए शख्स की मंशा साफ नहीं थी कि वह इसे पूरा करेगा भी या नहीं लेकिन महिला को शारीरिक संबंध बनाने के लिए बाध्य किया गया, कोर्ट ने कहा, यह धारणा गलत है। महिला को किसी तरह की गलतफहमी थी। वहीं दूसरी ओर वादे को पूरा न कर पाने को झूठा वादा नहीं कहा जा सकता। वादा करते समय उसका इरादा उसे पूरा करने का नहीं था।



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