इंदौर न्यायालय द्बार दिया गया एक निर्णय , संतान की सजा के हकदार मां बाप होते हैं।




अपराध :- 



संतान को संस्कार देना, सभ्य बनाना और माता पिता का कर्तव्य है. लेकिन वर्तमान में अधिकाधिक सम्पत्ति अर्जित करने के चक्कर में वे अपने कर्तव्य पर ध्यान नहीं देते जिसका कुपरिणाम समय आने पर संतान के साथ पालकों को भी भुगतना ही पड़ता है ।'जो जैसा करता है, वैसा फल पाता है', ऐसा होता तो सबके साथ ही, लेकिन ज्यादातर घटनाओं में यह बात सामने नहीं आ पाती. इसे समझने के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर न्यायालय द्वारा दिया गया एक निर्णय जानना चाहिए ।इंदौर हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट ने कड़ी फटकार के साथ याचिकाकर्ता जूबेदा बी पर १५ हजार की कास्ट लगाई है. दरअसल, जुबैदा ने हाईकोर्ट की डीबी बेंच द्वारा जारी आदेश को छुपा कर, धोखे से हाईकोर्ट की सिंगल बेंच से बिल्डिंग निर्माण पर गत २२ अक्टूबर को स्टे ले लिया था ।इसके बाद अब जस्टिस रोहित आर्य के सामने प्रशांत सागर नाम की बिल्डिंग का निर्माण करने वाले यासीन पटेल, यूसुफ पटेल और इरफ़ान पटेल के वक़ील एके सेठी ने यह राज खोला तो हाईकोर्ट ने कड़ी फटकार के साथ न केवल स्टे वैकेट कर दिया बल्कि, जूबेदा बी पर १५ हजार रुपए की कास्ट भी लगा दी ।कास्ट की राशि एक सप्ताह के भीतर प्रशांत सागर नाम से भवन का निर्माण करने वाले पटेल परिवार सहित प्रत्यर्थीगणों को देने का भी आदेश दिया गया है ।इस मामले में खास बात यह पता चली है कि, जूबेदा बी के नाम से सारे काम उनका लड़का शरीफ पटेल करता है, जो धोखाधड़ी के केस में पहले जेल भी जा चुका है. इस तरह कहा जा सकता है कि, कागजातों के आधार पर भले ही जुबेदा आरोपी मानी जावेंगीं किंतु, असली अपराधी तो उसका लड़का ही है ।