अयोध्या मामले पर जमीयतुल - उलेमा - ए - हिन्द ने फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल , २१७ पन्ने की याचिका में जाने क्या हुआ।






नई दिल्ली: अयोध्या मामले पर जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द की ओर से सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल गई है। याचिका एम सिद्दीक की ओर से दाखिल की गई है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से ९ नवंबर के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की गई। सूत्रों के मुताबिक जमीअत ने कोर्ट के फैसले के उन तीन बिंदुओं को फोकस किया है, जिसमें ऐतिहासिक गलतियों का ज़िक्र है, लेकिन फैसला इनके ठीक उलट आया है। याचिका में कहा गया है कि अव्वल तो ये कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि इस बात के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं कि मन्दिर तोड़कर मस्जिदबनाई गई वहीं दूसरी बिन्दु की  १९४९ की रात आंतरिक अहाते में मूर्तियां रखना भी गलत था, ये सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बात कही थी। ६ दिसंबर १९९२ को विवादित ढांचा तोड़ना भी गलत था। लेकिन इन गलतियों पर सजा देने के बजाय उनको पूरी ज़मीन दे दी गई। याचिका में कहा गया है कि लिहाजा कोर्ट इस फैसले पर फिर से विचार करे।याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट का निष्कर्ष सही नहीं है कि यह दिखाने के लिए सबूत हैं कि हिंदुओं ने मस्जिद के परिसर में १८५७ से पहले पूजा की थी। ये भी निष्कर्ष सही नहीं कि यह दिखाने के लिए सबूत हैं कि १८५७ और १९४९ के बीच आंतरिक आंगन मुस्लिम के कब्जे में थे। कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने निष्कर्ष में कहा था कि मस्जिद पक्ष  प्रतिकूल कब्जे को साबित करने में सक्षम नहीं रहा और ये भी सही नहीं है।याची ने अपनी याचिका में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई की रिपोर्ट में पढ़ा था कि यह निष्कर्ष निकाला गया कि मस्जिद खाली भूमि पर नहीं बल्कि एक गैर-इस्लामी संरचना के खंडहरों पर बनाई गई थी,  जो कि १०वीं शताब्दी के बड़े पैमाने पर हिंदू ढांचे से मिलती जुलती थी। ये भी सही नहीं है। अदालत ने यात्रियों, इतिहासकारों और लेखकों के खातों के रूप में हिंदू पक्ष द्वारा दिए गए सबूतों को स्वीकार किया लेकिन हमारे द्वारा सुसज्जित साक्ष्य को अनदेखा कर दिया ।याचिका में कहा गया है है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस निष्कर्ष पर गलती की है कि हिन्दू लोग निर्विवाद रूप से मस्जिद के अंदर पूजा करते थे जो भीतर के गर्भगृह को भगवान राम का जन्म स्थान मानते हैं।  मुस्लिम पक्ष को अनुच्छेद १४३ के तहत मुस्लिम पक्ष को ५ एकड जमीन देने का फैसला भी सही नहीं।


सम्पर्क सूत्र :- कलाम द ग्रेट न्यूज़