लखनऊ रेजीडेंसी के पास हॉस्टल के ध्वस्तीकरण पर रोक ,

लखनऊ इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने रेजीडेंसी के निकट बन रहे नर्सेज हॉस्टल के दोस्ती करण पर अंतिम रोक लगा दी है। या आदेश जस्टिस संगीता चंद्रा की एकल पीठ ने यूपी राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड की ओर से अधिवक्ता गौरव में मेहरोत्रा द्वारा दाखिल याचिका पर दिया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई)ने इस हॉस्टल को हटाने का आदेश दिया गया था अब तक वहां 7 मंजिल निर्माण हो चुका है याची के वकील का कहना था कि केजीएमयू के लिए ट्रांजिट नर्सेज हॉस्टल बनने के लिए चिकित्सा शिक्षा व परीक्षण विभाग द्वारा 106 करोड़ 60 लाख 31 हजार रुपए स्वीकृत किए गए थे । हॉस्टल का निर्माण एजेंसी के समीप होना था। याची के मुताबिक निर्माण के दौरान एएसआई अधिकारियों द्वारा कहा गया कि उक्त निर्माण रीजेंसी के रेगुलेटेड एरिया में हो रहा हैलिहाजा इसे रोका जाए जिसके बाद एनओसी के लिए एएसआई के समक्ष प्रत्यावेदन दिया गया प्रोग्राम इसके लिए संयुक्त निरीक्षण भी हुआ वह साउथ एशियन आखिरी आर्कियोलॉजी नाम की पंजीकृत संस्था द्वारा हेरीटेज इंपैक्ट असेसमेंट रिपोर्ट भी दाखिल की गई उक्त रिपोर्ट में रिलीजन सी पर निर्माण का कोई भी प्रभाव ना पढ़ने की बात कही गई। बावजूद इसके 6 फरवरी 2019 को एनओसी देने से इंकार कर एसआई ने निर्माण हटाने के निर्देश दिए। इसके विरुद्ध याची ने अपील दाखिल की जो 30 अगस्त 2019 को खारिज हो गई। याचिका का विरोध में केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि याची ने बिना एनओसी निर्माण किया लिहाजा एएसआई का निर्माण को गिराने का आदेश विधि समस्त है।