सुरक्षा बल को लेकर केंद्र सरकार जवानों में निरंतर बढ़ रही आत्महत्या के मामले को लेकर बेहद चिंता , वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय सुरक्षा बल के अधिकारी अपने ही बल के जवानों के साथ दुर्व्यवहार करने में बाज ही नहीं आ रहे हैं.

एक तरफ केन्द्र सरकार सुरक्षाबल के जवानों में निरन्तर बढ़ रही आत्महत्या के मामलों को लेकर बेहद चिंतित है तो दूसरी तरफ केंद्रीय सुरक्षा बल के अधिकारी अपने ही बल के जवानों से दुर्वव्यवहार करने से बाज ही नही आ रहे है। 



ताज़ा मामला पड़ोसी राज्य ओडिसा का है,यहाँ 64 बटालियन.(ओडिसा) सीआरपीएफ, फोर्स नंबर 095250468 सीटी/जीडी- अमोल खड़त, जो की आरटीसी-सी आर पी एफ राजगीर(बिहार)अटैच ड्यूटी में गया हुआ था। वहां जीओ'स मैस में पी.सी. की ड्यूटी कर रहा था। तभी डी आई जी नेगी किसी बात पर उससे नाराज हो गए। उन्होंने गुस्से में आकर न केवल पीड़ित जवान से दुर्व्यवहार किया। बल्कि डीआईजी साहब ने सिपाही अमोल को अपने पास बुलवाया और ताव में आकर गर्म खौलता हुआ गर्म पानी उसके मुंह पर दे मारा। बताया जा रहा है कि इस पर भी उक्त बदमिजाज अधिकारी का गुस्सा शांत नही हुआ तो उसने जवान की जर्सी के अंदर भी उस गर्म पानी को जबरदस्ती उड़ेल दिया। इससे  जवान बुरी तरह घायल हो गया और उसकी हालत बहुत खराब हो गई। घायल जवान का चेहरा और सीने की चमड़ी झुलस गई । उसकी हालत बिगड़ती देख उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। परन्तु डी आई जी त्रिपाठी के आदेश पर पीड़ित जवान का फोन जप्त कर  लिया गया है। उस पर बराबर नजर भी रखी जा रही है। ताकि आहत जवान मीडिया और परिवार वालो से मिल न पाए। इस बात की निगरानी डी आई जी व बल के अन्य अधिकारी भी रख रहे है। घायल जवान अमोल खरात पर बराबर दबाव भी बनाया जा रहा है,कि घटना को लेकर पीड़ित जवान कही कोइ शिकायत न कर पाए। बहरहाल घटना को लेकर बल के अन्य जवान जो नाराज थे,उनमे से किसी ने सोशल मीडिया में जवान का वीडियो बनाकर वायरल कर दिया है। अब देखने वाली बात यह है कि उक्त  घटना को कारित करने वाले बदमिजाज अधिकारी के विरुद्ध विभागीय जांच बैठाई जाती है या नही। वही सोशल मीडिया में वायरल सन्देश में dig नेगी या त्रिपाठी (स्पष्ट नही है) उसका पूरा नाम तथा पीड़ित जवान का पता व फोन नंबर उपलब्ध नही है।
*वहीं खबर लिखे जाने तक जानकारी मिली है कि सी आर पी एफ मुख्यालय ने भी घटना की पुष्टि की है। साथ ही निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।*


*विभागीय प्रताड़ना के कारण  ही जवान सबसे अधिक आत्महत्या कर रहे है,*


केंद्रीय सुरक्षा बल के अलावा प्रदेश पुलिस यहा तक की भारतीय सेना में भी निरंकुश अधिकारियों की वजह से  जवान और सैनिको में आत्महत्या की प्रवृति बढ़ने लगी है। आकड़ो पर जाए तो साल 2011 से 2018 के बीच भारतीय सशस्त्र बलों (सेना, वायु सेना, नौसेना) के 892 कर्मियों ने आत्महत्या कर ली है. संसद में पिछले वर्षों में पूछे गए सवालों से यह आंकड़ा सामने आया है. आत्महत्या करने वालों में सेना के जवान ज्यादा हैं.
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 2011 में 132, 2012 में 111, 2013 में 117, 2014 में 112, 2015 में 86, 2016 में 129, 2017 में 101 और 2018 में 104 मामले सामने आए. इन आठ वर्षों में आर्मी के 707, एयरफोर्स के 148 कर्मियों और नेवी के 37 कर्मियों ने सुसाइड किया है. आंकड़ों के मुताबिक साल 2011 में सेना के जवानों के सुसाइड की संख्या में काफी तेजी से इजाफा हुआ था और उस साल आत्महत्या के 105 वाकये सामने आए थे. इसी तरह साल 2016 में भी सेना में आत्महत्या से 101 मौतें हुई थीं। 


पिछले तीन साल की बात करें तो साल 2016 में सैन्य कर्मियों के आत्मदाह के 129 मामले, 2017 में 101 मामले और 2018 में 104 मामले सामने आए. साल 2016 में आर्मी में सुसाइड के 104 मामले, नेवी में 6 मामले और एयरफोर्स में 19 मामले सामने आए. इसी तरह 2017 में आर्मी में सुसाइड के 75, नेवी में 5 और एयरफोर्स में 21 मामले सामने आए. साल 2018 में आर्मी में सुसाइड के 80, नेवी में 8 और एयरफोर्स में 16 मामले सामने आए। वहीं सरकार द्वारा लोकसभा में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, केंद्रीय सैन्य पुलिस बलों में साल 2012-15 के बीच आत्महत्या के सबसे अधिक मामले सीआरपीएफ में देखे गए, जहां 149 जवानों ने आत्महत्याएं की है। हाल ही के कुछेक मामलों में सी आर पी एफ और itbp के जवानों ने मानसिक तनाव अथवा विभागीय प्रताड़नाओं के कारण अपने ही साथियों या अधिकारियों की हत्या की है। विशेषज्ञों की माने तो जवानो की आत्महत्या से लेकर अपने कैम्प में अपने ही साथी जवानो और अधिकारियों को गोली मारने की घटना के पीछे सबसे बड़ा कारण विभागीय प्रताड़ना होती है। जिसमे समय पर छुट्टी नही मिलना,अपमान जनक व्यवहार करना,निकृष्ट कार्यों के लिए मजबूर करना जैसी वजहें प्रमुख होती है