*बंजरिया कृषि फार्म पर बकरी पालन प्रशिक्षण शिविर का हुआ आयोजन*

" कलाम द ग्रेट न्यूज ब्यूरो चीफ जी पी दुबे "

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 *बंजरिया कृषि फार्म पर बकरी पालन प्रशिक्षण शिविर का हुआ आयोजन*

बस्ती 20 जनवरी 2024.

आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र, बंजरिया द्वारा ‘‘बकरी पालन’’ पर प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। केन्द्राध्यक्ष डा.एस.एन. सिंह ने प्रशिक्षणार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि बकरी के मांस एवं दूध की मांग दिनों-दिन बढती जा रही है, क्योंकि बकरी के दूध में डेंगूॅ रोग से बचाव की प्रतिरोधक क्षमता है। कोई भी व्यक्ति कम स्थान एवं कम पूंजी में आसानी से बकरी पालन का स्वरोजगार करके अपनी जीविका का निर्वहन कर सकता है। 

पशुपालन विशेषज्ञ डा.डी.के.श्रीवास्तव ने बताया कि बकरी पालन मुख्यतयः मांस, दूध, बाल, खाल एवं खाद के लिए किया जाता है। जनपद की जलवायु के अनुरूप बकरी की बरबरी, जमुनापारी एवं ब्लैक बंगाल उपयुक्त नस्लें है, जो दूूध के साथ ही साथ उच्च गुणवत्ता का मांस भी उपलब्ध कराती है तथा प्रत्येक ब्यात में दो बच्चे देती है। बरबरी नस्ल की बकरियों में नर बच्चे ज्यादा पैदा होते है, जिनको आसानी से मांस हेतु पाला जा सकता है। डा. श्रीवास्तव ने बकरियों हेतु सस्ते आवास का निर्माण, स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधन द्वारा संतुलित आहार तैयार करने की विधि तथा बकरियों की प्रमुख बीमारियों एवं उनके निदान के विषय में विस्तृत जानकारी प्रदान की। 

शस्य वैज्ञानिक हरिओम मिश्र ने बताया कि बकरियों को हरा-चारा ज्यादा पसन्द है, इसलिए मौसम के अनुसार बरसीम, जई, लोबिया, मक्का व चरी की बुवाई करें तथा बहुवर्षीय हरा चारा जैसे हाईब्रिड नैपियर घास के साथ ही साथ पीपल, पाकड, गूलर, शूबबूल, बरगद व सहजन आदि के पौधों का रोपण करें, जिससे बकरियो को वर्ष भर पर्याप्त हरा चारा मिलता रहे।

वैज्ञानिक पौध सुरक्षा डा. प्रेम शंकर ने बताया कि बकरियों की सबसे घातक बीमारी पी.पी.आर. है, जो बकरियों में बहुत तेजी से फैलती है, जिसके कारण बकरियों की मृत्यु सबसे ज्यादा होती है। इसके बचाव हेतु प्रत्येक बकरी को पी.पी.आर. का टीका करण समय से अवश्य करा देना चाहिए। बकरियों को प्रत्येक छः माह के अन्तराल पर पेट के कीडें मारने की दवा (गाभिन बकरी को छोडकर) अवश्य देना चाहिए। 

   कार्यक्रम का संचालन करते हुए डा. वी.बी. सिंह ने बताया कि बकरीशाला की निरन्तर सफाई करते रहना चाहिए, क्योंकि यदि बकरीशाला गन्दा रहेगा, तो उसमे शरीर पर लगने वाले कीडें जैसे जूॅ, किलनी, मक्खी आदि उत्पन्न हो जायेगें, जो बकरियों के शरीर का खून चूसेगें, जिससे उनमें कई बीमारियॉ उत्पन्न हो जायेगी और उनकी उत्पादन क्षमता प्रभावित होगी। इसलिए बकरीशाला के आस-पास गन्दगी इकट्ठा न होने दें तथा बकरीशाला की चूना से पुताई करें एवं कीटनाशक का छिडकाव निरन्तर करते रहें।

   कार्यक्रम में प्रशिक्षणार्थियों का प्रमाणपत्र के साथ ही साथ बहु कटाई-बहु वर्षीय हरा चारा हाईब्रिड नैपियर के पौध भी वितरत किये गये। इस अवसर पर नरेन्द्र कुमार, अरूण चौधरी, राम शंकर यादव, आशुतोष कुमार पाण्डेय, कुसुम देवी, राधेश्याम चौधरी एवं रवि शंकर पाण्डेय आदि मौजूद रहें।

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